January 17, 2011

उस को माज़ी का कुछ ख्याल रहा

तेरी यादों का दिल पे जाल रहा
ज़ख्म पर रेशमी रुमाल रहा

खुद ही दिल से तुझे निकाला था,
ये अलग बात के मलाल रहा

एक बस तुझ से ही तवक्को थी
ऐ खुदा! तू भी बेख्याल रहा

अच्छा होगा, कहा था वाइज़ ने
पहले जैसा मगर ये साल रहा

तूने लिक्खे तो हैं जवाब कई
दिल में लेकिन वही सवाल रहा

शुक्र है, हंस के वो मिला 'साहिल'
उस को माज़ी का कुछ ख्याल रहा

----------------------------------
तवक्को = उम्मीद, expectation , hope
वाइज़ = preacher
माज़ी = गुज़रा वक़्त, past



28 comments:

  1. खूब ... कमाल अभिव्यक्ति.....

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  2. दिल के हालात का जायजा लेती हुई एक उम्दा ग़ज़ल।
    अच्छा लिखते हैं आप, ग़ज़ल पसंद आई।
    मुबारकबाद।

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  3. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना आज मंगलवार 18 -01 -2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/402.html

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  4. मत्ले से मक्ते तक ग़ज़ल बेहतरीन.

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  5. awwwww....lovely :) bohot bohot khoobsurat ghazal hai...saare sher kamaal hain...aur maqta to bas...wahhh...!!

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  6. जवाब मिल कर भी सवाल रहा ...बहुत सुन्दर गज़ल

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  7. बहुत खूब ... साहिल जी मस्त ग़ज़ल है ... लाजवाब शेर ... खुद ही दिल से निकाला था ... ये शेर बहुत पसंद आया ...

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  8. 'तूने लिक्खे तो हैं जवाब कई
    दिल में लेकिन वही सवाल रहा '
    खूबसूरत शेर ...
    उम्दा ग़ज़ल...

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  9. तूने लिखे तो है जवाब कई
    दिल में लेकिन वही सवाल रहा
    हर शेर उम्दा है...ये हासिले-ग़ज़ल लगा.
    अच्छे कलाम के लिए मुबारकबाद.

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  10. तूने लिख्खे तो हैं जवाब कई
    दिल में लेकिन व्ही सवाल रहा

    इस बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मेरी दिली दाद कबूल फरमाएं...

    नीरज

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  11. बेमिसाल ग़ज़ल है हर एक शेर तराशा हुआ नगीना सा है

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  12. hmmmmmmm very nice post dear.... keep it up

    Music Bol
    Lyrics Mantra

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  13. तूने लिख्खे तो हैं जवाब कई
    दिल में लेकिन वही सवाल रहा..

    बेजोड़...दाद कबूल करें



    नीरज

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  14. बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

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  15. bahut achchi gazal hui hai bhai,har sher lajawab.

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  16. दर्द भरी बहतरीन गज़ल .......

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  17. शायरी की जमात में साहिल,
    तूने जो भी कहा कमाल रहा !!!

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  18. प्रिय साहिल जी
    बहुत शानदार ग़ज़ल लिखी है , मुबारकबाद है !
    सारे अश्'आर बेहतर हैं …

    तेरी यादों का दिल पे जाल रहा
    ज़ख्म पर रेशमी रुमाल रहा

    एक बस तुझ से ही तवक़्क़ो थी
    ऐ ख़ुदा! तू भी बेख़याल रहा

    शुक्र है, हंस के वो मिला 'साहिल'
    उस को माज़ी का कुछ ख्याल रहा

    स्वर्णकार हम हैं , लेकिन हीरे आप भी जड़ रहे हैं … :)
    वाह वाऽऽह !


    मैं भी कहना चाहूंगा -

    तुमने 'साहिल'ग़ज़ल कमाल कही
    इसका हर शे'र बेमिसाल रहा

    ~*~ हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !~*~

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  19. बहुत शानदार ग़ज़ल लिखी है ,

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  20. शुक्र है , हंस के वो मिला 'साहिल '
    उस को माजी का कुछ ख्याल रहा

    सुभानाल्लाह ....!!

    साहिल जी आप भी कमाल करने लगे अब ......

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  21. यह गज़ल भी बहुत बढ़िया है..मतला तो कमला है..

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  22. प्रिय बंधुवर संदीप साहिल जी
    सस्नेहाभिवादन !


    नई ग़ज़ल पढ़ने आया था … पोस्ट बदलें तब मेल से सूचित अवश्य कीजिएगा

    इस गज़ल के लिए पुनः हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    शस्वरं पर आपका इंतज़ार है …

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  23. शुक्र हैं हंसके मिला वो साहिल.
    उसको माजी का ख्याल रहा.

    वाह साहब, हम आपके कद्रदान हो गए.

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यहाँ आने का और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों से नवाज़ने का शुक्रिया!

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