November 24, 2010

ख़त तुझे मैंने बेहिसाब लिखे

कोई ऐसी भी इक किताब लिखे
सब सवालों के सब जवाब लिखे

हमने काली स्याह रात में भी
जगमगाते हुए से ख्वाब लिखे

कोई चेहरा भला पढूं कैसे
सबके चेहरों पे हैं नकाब लिखे

अब यहाँ हो रही नीलाम कलम
कौन है जो के इन्कलाब लिखे

कोई माली है जो नसीब लिखे
कहीं कांटे कहीं गुलाब लिखे

ये अलग बात, भेजता ही नहीं 
ख़त तुझे मैंने बेहिसाब लिखे

जाने 'साहिल' तुझे हुआ क्या है
इक ज़रा मौज को सैलाब लिखे

17 comments:

  1. बहुत अच्छी ग़ज़ल कही .... तीसरा और चौथा शेर खास अच्छे लगे....

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  2. काली स्याह रात में जगमगाते से ख्वाब ..बहुत सुन्दर भाव ...

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  3. koi aisi bhi ik kitaab likhe
    sab sawaalon ke sab jawaab likhe

    wahh!!!!!
    bohot umda ghazal hai dost, bohot khoob

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  4. बहुत खूबसुरत अंदाज

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  5. "ab yahan ho rahi neelam kalam
    kaun hai jo ke inqlab likhe"
    umda sher..
    achchhi gazal..

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  6. आपकी इस पोस्ट का लिंक कल शुक्रवार को (२६--११-- २०१० ) चर्चा मंच पर भी है ...

    http://charchamanch.blogspot.com/

    --

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  7. बहुत सुन्दर गज़ल 3,4 शेर बहुत पसन्द आया।

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  8. इन गिरते उठते शब्दों में ,
    आपने कितने बढ़िया ख्यालात लिखे :-)
    खूब !!

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  9. हमने काली स्याह रात में भी
    जगमगाते हुए से ख्वाब लिखे ...

    बहुत खूब ... ग़ज़ल का अंदाज़ लजवाब है ... मज़ा आ गया पढ़ कर सारे शेर ...

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  10. झकझोरते हुए भाव को जीती हुई गज़ल!

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  11. गहन भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  12. वाह क्या ग़ज़ल लिखी है साहिल साहब, एक एक शेर कमाल है...

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  13. 6.5/10

    अब यहाँ हो रही नीलाम कलम
    कौन है जो के इन्कलाब लिखे
    बहुत खूब ...
    उम्दा ग़ज़ल
    हर शेर ध्यान खींचने में कामयाब है

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  14. sahilji,

    umda gazal.

    "har insan me hote hai das bis aadmi
    jise bhi dekhna kae bar dekhna..."


    likhte rhiye, hum aate rhenge padne ke liye...

    hamare blog me visit kare:

    http://ashoklalwani.blogspot.com/

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  15. Fantastic Sahil Sahab!! Loved it.

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  16. khubsurat ghazal hai dost,....bahut khubsurat.... "naqab likhe" yah prayog to mujhe sabse jyada pasand aayaa ....

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यहाँ आने का और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों से नवाज़ने का शुक्रिया!

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